VIDEO: ‘वैसी वाली’ पिक्चर में लड़कियों को सबके सामने ही वो सब करना पड़ता है.. ..

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Anand Film का एक Dialogue है, ‘जीना तो बंबई (अब मुंबई) में, मरना तो बंबई में।’ बस ये एक संवाद मुंबई के अस्तित्व को बयां करने के लिए काफ़ी है। हर साल ना जाने कितने लोग अपने सपने लिए समंदर के किनारे इस शहर की गोद में जाकर बैठ जाते हैं। हर दूसरा शख़्स यहां अभिनेता, निर्देशक और फ़िल्मों से जुड़े अन्य कामों को करने के लिए आता है।

यहां बॉलीवुड में फिल्में तो बनती ही हैं, लेकिन इसके साथ-साथ यहां बी और सी ग्रेड की फ़िल्मों का निर्माण भी किया जाता है। हमारे देश में लोग सेक्स के मसले पर बात करने से हिचकिचाते हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा जनसंख्या ऐसे ही तो नहीं बनी? खैर हम वो बी और सी ग्रेड की बात कर रहे थे।

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