सिंधु जल समझौता: 1960 में हुआ नेहरू और अयूब खान का समझौता अब आगे नहीं चलेगा

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PAKISTAN के साथ सिंधु जल संधि पर INDIA सख्‍ती बरत रहा है। मामले में PM MODI की अध्यक्षता में नई दिल्ली में सोमवार को एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। खबरों के मुताबिक, जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि खून और पानी एकसाथ नहीं बह सकते। बताया जा रहा है कि पाकिस्‍तान का पानी रोका जा सकता है। इसके साथ ही एक अन्‍य उपाय के रूप में उसको दिए जाने वाले पानी में कटौती की जा सकती है।

चिनाब नदी पर बांध बनाने का काम भी तेज किया जाएगा। यहां पर पाकुल दुल, सवालकोट और बुरसर बांध बनाए जाने हैं। तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्‍ट पर भारत फिर से विचार करेगा। इस पर साल 2007 में काम रोक दिया गया था। सिंधु जल संधि के तहत भारत पश्चिमी नदियों से 18 हजार मेगावॉट ऊर्जा का इस्‍तेमाल करेगा। इन नदियों पर भारत के अधिकारों के लिए अंतर मंत्रालयी टास्‍क फॉर्स गठित की जाएगी।

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